भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'संवैधानिक उपचारों के अधिकार' से संबंधित है जिसे डॉ. अंबेडकर ने संविधान का हृदय और आत्मा कहा था?
- A. अनुच्छेद 14
- B. अनुच्छेद 21
- C. अनुच्छेद 19
- D. अनुच्छेद 32
Explanation
अनुच्छेद 32 (Article 32) 'संवैधानिक उपचारों के अधिकार' (Right to Constitutional Remedies) से संबंधित है, जिसे डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने संविधान का 'हृदय और आत्मा' (Heart and Soul) कहा था, क्योंकि यह नागरिकों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन होने पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में जाने और न्याय पाने का अधिकार देता है, जो अन्य मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है।
संविधान सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों को आदेश या रिट जारी करने का अधिकार देता है।
अनुच्छेद 32 (Article 32) के तहत भारतीय संविधान सर्वोच्च न्यायालय को 5 प्रकार की रिट (Writ) जारी करने की शक्ति देता है, जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए हैं: बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), निषेध (Prohibition), उत्प्रेषण (Certiorari), और अधिकार पृच्छा (Quo Warranto), जो मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सुरक्षा प्रदान करती हैं, जैसे गैरकानूनी हिरासत से मुक्ति, कर्तव्य पालन का आदेश, या अवैध शक्ति के प्रयोग पर रोक लगाना,.
रिट के प्रकार (Types of Writs):
- बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus): यह किसी व्यक्ति को अवैध हिरासत से बचाने के लिए जारी की जाती है, जिसमें न्यायालय हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अदालत के समक्ष पेश करने का आदेश देता है.
- परमादेश (Mandamus): यह न्यायालय द्वारा किसी सार्वजनिक अधिकारी, निगम, या निचली अदालत को उसके कानूनी कर्तव्य का पालन करने का आदेश देने के लिए जारी की जाती है.
- निषेध (Prohibition): यह किसी निचली अदालत या न्यायाधिकरण को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कोई कार्रवाई करने से रोकने के लिए जारी की जाती है.
- उत्प्रेषण (Certiorari): यह किसी निचली अदालत या न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए अवैध या गलत आदेश को रद्द करने या उस पर रोक लगाने के लिए जारी की जाती है.
- अधिकार पृच्छा (Quo Warranto): यह किसी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक पद पर अवैध तरीके से दावा करने पर, उससे उस पद पर रहने के अधिकार के बारे में सवाल पूछने के लिए जारी की जाती है.
महत्व (Significance):
- डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने अनुच्छेद 32 को भारतीय संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा था, क्योंकि यह मौलिक अधिकारों का संरक्षक है और उन्हें लागू करने का अधिकार देता है.
- अनुच्छेद 32 के तहत, नागरिक अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन होने पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय जा सकते हैं, और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय भी ये रिट जारी कर सकते हैं.

