- A. दृश्य चित्रण
- B. व्यक्ति चित्रण
- C. पशुओं का शिकार
- D. पौराणिक
Explanation
प्रागैतिहासिक गुफा चित्रों की विषय-वस्तु प्रमुख रूप से आखेट रही है, अतः उसने सांभर, बारहसिंगा, महिष, गैंडा, हाथी, घोड़ा, खरगोश, सुअर तथा विभिन्न पक्षियों को भी चित्रों में अंकित किया, इसके अतिरिक्त घुड़सवार, पशुओं को चराते हुए, पुष्प पत्तियों का प्रतीकात्मक अंकन भी हुआ है। कृषि जीवन व दैनिक क्रियाकलापों का अंकन व जादू के प्रागैतिहासिक रेखाओं के द्वारा बनाया गया है अन्यथा पूर्ण रूप से या पूरक रूप से क्षेपांकन (Stencil) पद्धति का प्रयोग हुआ है। पशु तथा मानव का बाह्य आकार बोध ही इस चित्रण की विशेषता रही है। प्रागैतिहासिक चित्रों में संयोजन किसी योजनाबद्ध रूप में नहीं हुआ है। पशु चित्रों में कहीं-कहीं काले व लाल रंग से छाया प्रकाश दर्शाने का प्रयास किया गया है। प्रागैतिहासिक चित्रों में मेरू, रामरज, काजल व खड़िया जैसे रंगों का सहज प्रयोग किया गया है।
📌 परीक्षा: BHU Art 2012
- A. प्रकृति दृश्य
- B. शिकार दृश्य
- C. पर्वतीय दृश्य
- D. मानवाकृतियाँ
Explanation
* भारत में सर्वप्रथम चित्रों की खोज 1867-68 ई. में पुराविद आर्चीवाल कार्लाइल ने की थी।
* प्रागैतिहासिक शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1851 ई. स्काटलैण्ड के वैज्ञानिक 'डेनियल विल्सन' ने अपनी किताब "द अर्कियोलाजी एण्ड प्री हिस्टोरिक एनालसस ऑफ स्कॉटलैण्ड" में किया था।
* सी.जे. थामसन ने प्रागैतिहासिक काल को तीन भाग में विभाजित किया है।
* प्रागैतिहासिक कला का प्रथम प्रमाण विश्व में 1879 ई. स्पेन की अल्तामीरा गुफा से प्राप्त होता है।
* भारत में प्रागैतिहासिक कला का प्रथम प्रमाण 1880 ई. मिर्जापुर से प्राप्त है।
* प्रागैतिहासिक काल के चित्रों का विषय पशु एवं पशु आखेट तथा उल्लास एवं विजय के चिन्न।
* प्रागैतिहासिक काल के चित्रकारों को ओझा कहा जाता था।
* प्रागैतिहासिक काल में खनिज रंग को मुख्यतः प्रयोग में लिया गया, जिसमें गेरु रंग की प्रमुखता से प्रयोग किया गया है।
* प्रागैतिहासिक काल में रंगों में पशुओं की चर्बी मिलाकर प्रयोग करते थे।
* प्रागैतिहासिक काल की धरातल गुहा एवं खुरदुरी चट्टाने हैं।
📌 परीक्षा: RPSC Assistant Prof. 2020 (1)
- A. गोंद
- B. जानवरों की चर्बी
- C. गोमूत्र
- D. तेल
Explanation
प्रागैतिहासिक चित्र प्रायः खुरदरी चट्टानों की दीवारों, गुफाओं के , छतो या भित्तियों पर बनाये गये हैं। अनेक चित्र प्रस्तर शिलाओं पर भी प्राप्त हुए है। चित्र प्रायः लाल (हिरौंजी एवं गेरू), काले (कोयला या काजल) सफेद खड़िया रंगों से बने है। इन रंगों को तैयार करने एवं इस्तेमाल करने से पूर्व इन्हें पशुओं की चर्बी में मिलाया जाता था।
📌 परीक्षा: RPSC (Drawing & Painting) 2018, RPSC-2015, RPSC-2013
- A. मिर्जापुर से
- B. सिंघनपुर से
- C. होशंगाबाद से
- D. भीमबेटका से
Explanation
मरता हुआ भैंसा या घायल भैंसा (Dying Buffalo) चित्र सिंघनपुर (रायगढ़, छत्तीसगढ़) की गुफाओं से प्राप्त हुआ है।
* सिंघनपुर के चित्रों की खोज सन् 1910 ई. में डब्ल्यू. एण्डर्सन ने की उसके बाद सन् 1913 ई. में अमरनाथ ने व सन् 1917 ई. में पर्सी ब्राउन ने इन चित्रों का परिचय दिया।
* सिंघनपुर में गुफा के द्वार पर 'असंयत कंगारु' के चित्र चित्रित है।
इस प्रश्न के बारे मे विस्तृत जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें
📌 छत्तीसगढ़ के प्रागैतिहासिक चित्र: सिंघनपुर की गुफाओं का रहस्य और इतिहास
📌 परीक्षा: Haryana TGT 2020
- A. उत्तराखण्ड
- B. उत्तर प्रदेश
- C. मध्य प्रदेश
- D. बिहार
Explanation
चित्रित शैलाश्रय "लखुठड्यार" उत्तराखण्ड में स्थित है।
* लखुदियार गुफाएँ उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा जिलें में सुयाल नदी के तट पर बरेछिना गाँव में स्थित है। गुफाओं की दीवारों पर काले, लाल और सफेद रंग की उंगलियों से बनाई जानवरों, मनुष्यों और टेक्टिफार्म को चित्रित करने वाले चित्र है। कुछ जानवरों के रूपांकन भी है, उनमें से एक लोमड़ी के समान है। लहरदार रेखाएँ आयत से भरी ज्यामितीय डिजाइन और बिन्दुओं के समूह यहाँ देखे जाते है।
* लखुदियार का अर्थ है 'एक लाख गुफाएं'।
📌 परीक्षा: UK PSC Lecturer 2020 (Mains)
- A. आत्म संतुष्टि और भावों की अभिव्यक्ति दूसरों तक पहुँचाना
- B. अपनी सरल व प्रसन्नतापूर्ण प्रकृति को व्यक्त करना
- C. अपनी आस्था और विश्वास की कहानी बताना
- D. उक्त सभी
Explanation
प्रागैतिहासिक काल के चित्रों की विशेषताएँ-
* प्रागैतिहासिक चित्र प्रायः खुरदरी चट्टानों की दिवारों गुफाओं के फर्शों छतों या भित्तियों पर बनाये गये हैं।
* ज्यामितीय आकारों का प्रयोग प्रकृति की विभिन्न शक्तियों या जादू के विश्वास को व्यक्त करने हेतु किया गया है।
* चित्र प्रायः लाल (गेरु एवं हिरौजी) काले (कोयला या काजल) सफेद खड़िया रंगों से बने हैं। इन रंगों को इस्तेमाल करने से पूर्व इसमें पशुओं की चर्बी को मिलाया जाता था।
* आकृतियों के निर्माण में सीधी, वन और आयताकार आदि ज्यामितीय रूपाकारों का प्रयोग है। इसमें स्वास्तिक, त्रिभुज, वृत्त, षटकोण तथा आयताकार शामिल हैं।
* तूलिका किसी रेशेदार लकड़ी बाँस या नरकुल आदि को कूटकर बनाई जाती थी और पशुओं के पुड्ढे की हड्डी की प्याली रंग घोलने के काम में ली जाती थी।
* आत्म संतुष्टि और अपने भावों की अभिव्यक्ति दूसरों तक पहुँचाना तथा अपनी सरल व प्रसन्नतापूर्ण प्रकृति को व्यक्त करना तथा अपनी आस्था और विश्वास की कहानी चित्रों के माध्यम से व्यक्त करना।
📌 परीक्षा: RPSC Assistant Prof. 2020 (1)
- A. डब्लू एडर्सन
- B. प्रो. जुनेर
- C. स्टूअर्ट पिगट
- D. डी. एस. गार्डन
Explanation
भारत में प्रागैतिहासिक आलेखनों एवं चित्रों के पिर्गेट की पुस्तक 'प्री-हिस्टोरिक इंडिया, 1950 इस विषय की प्रामाणिक सामग्री से भरपूर है।
📌 परीक्षा: TGT 2013
- A. भोपाल
- B. देवास
- C. करछा
- D. ओबेदुल्लागंज
Explanation
भीमबेटका गुफाएँ भोपाल से 60 किमी० दक्षिण में भीमबेटका नामक पहाड़ी पर स्थित हैं। यह होशंगाबाद से भोपाल की ओर जाने वाली रेल लाइन पर उब्वेदुल्लागंज स्टेशन के समीप स्थित है।
* भीम बेटका में 600 गुफाएँ मिली है, जबकि 275 गुफाओं में चित्रो के अवशेष मिले हैं।
ज्यादा जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें :-
भीमबेटका गुफाओं का इतिहास, खोज और रोचक तथ्य | Bhimbetka Caves History in Hindi
📌 परीक्षा: UP Higher Asst. Prof. 2021
- A. पुरापाषण काल
- B. नवपाषण काल
- C. सिन्धु सभ्यता
- D. पाषाण युग
Explanation
नवपाषाण काल के अवशेष भी बहुत कम प्राप्त है और जो भी उदाहरण प्राप्त हैं। उनमे से अधिक 'वेलारी' के आसपास प्राप्त है। अब मानव पशुपालन व कृषि जैसे धंधो को अपनाने लगा था। और कलात्मक, वर्तन-भांडो का प्रयोग भी आरम्भ कर दिया। जो उसने नाम पर बनाये थे। उसके पुराने घुमक्कड़ स्वभाव में भी अन्तर आया। उसने अब गाँव में बसना शुरू कर दिया था।
📌 परीक्षा: BHU Art 2012
- A. अजीत घोष
- B. जगदीश गुप्त
- C. अमरनाथ दत्त
- D. एडरसन
Explanation
भारतीय प्रागैतिहासिक चित्रकला के लेखक डॉ. जगदीश गुप्त लेखक, कवि एवं चित्रकार के रूप में जाने जाते हैं। रेखांकन चित्रण में हस्तसिद्ध डॉ. जगदीश गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1924 ई. को शाहाबाद, हरदोई, उत्तर प्रदेश में हुआ था। आप की शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कला गुरू क्षितीन्द्रनाथ मजूमदार की देख-रेख में हुई थी। गुप्त जी की प्रसिद्ध पुस्तकों में "भारतीय कला के पचिन्ह" "प्रागैतिहासिक भारतीय चित्रकला" आदि है।
📌 परीक्षा: TGT 2011
- A. मंदिरों में
- B. महलों में
- C. गुफाओं में
- D. विहारों में
Explanation
चित्र प्रायः खुरदरी चट्टानों के दीवारों, गुफाओं के फशों, छतों या भित्तियों पर बनाये गये हैं। अनेक चित्र प्रस्तर शिलाओं पर भी प्राप्त हुए हैं।
📌 परीक्षा: TGT 2003
- A. आखेट
- B. कृषि
- C. व्यापार
- D. मछली पालन
Explanation
नव पाषाणकाल की प्रमुख विशेषता कृषि तथा पशुपालन का प्रारम्भ एवं पालिशदार पाषाण उपकरणों (विशेषकर कुल्हाड़ियों) का निर्माण है। मानव सभ्यता के इतिहास में कृषि के प्रारम्भ को एक 'क्रान्ति' के रूप में देखा गया है। बिल डूरेन्ट के शब्दों में समस्त मानव इतिहास एक प्रकार से दो क्रान्तियों पर आधारित है- नवपाषाणकालीन आखेट से कृषि में संचरण तथा आधुनिक कृषि से उद्योग में संचरण।
📌 परीक्षा: TGT 2009
- A. पर्सी ब्राउन
- B. वी०एस० वाकणकर
- C. डब्ल्यू एन्डरसन
- D. अमरनाथ
Explanation
भीमबेटका की गुफाओं की खोज 1957-1958 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर द्वारा की गई थी।
* भीमबेटका की गुफाएँ मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में विंध्याचल की पहाड़ियों में स्थित है, जो भोपाल से लगभग 45-50 किमी दूर है।
* भीमबेटका पहाड़ी पर लगभग 600 प्राचीन गुफाएँ प्राप्त हुई है। जहाँ करीब 275 गुफाओं में चित्रों के अवशेष प्राप्त है। यहाँ एक विशिष्ट चित्रसंसार रचा गया है।
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भीमबेटका गुफाओं का इतिहास, खोज और रोचक तथ्य | Bhimbetka Caves History in Hindi
📌 परीक्षा: Haryana TGT 2018
- A. राम
- B. शिव
- C. बुद्ध
- D. पांडव
Explanation
'पंचमढ़ी क्षेत्र के चित्रों को प्रकाश में लाने का श्रेय डी.एच. गार्डेन नामक विद्वान को है, जिन्होंने सन् 1936 ई. में यहाँ के चित्रों के संबंध में रेखा चित्रों तथा फलक चित्रों' सहित एक विशद लेख प्रकाशित किया। इस क्षेत्र को पंचमढ़ी सम्भवतः इसलिये कहा जाता है कि लोक विश्वासानुसार यहाँ 'पाण्डवों ने पाँच गुफाओं में निवास किया था। यहीं पर महादेव पर्वत के चारों ओर अवस्थित 'इमली खोह' गुफा में सांभर के आखेट का दृश्य, भाड़ा देव गुफा में शेर के आखेट का दृश्य, तथा महादेव बाजार में विशाल काय बकरी का चित्र प्राप्त हैं।
📌 परीक्षा: UP TGT 2021
- A. सूर्य
- B. कमल
- C. चक्र
- D. अग्नि
Explanation
भारतीय प्रतीक "स्वस्तिक" सूर्य से विकसित हुआ है। स्वस्तिक अत्यन्त प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति में "मंगल" का प्रतीक माना जाता है। इसी लिये किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले "स्वस्तिक" चिन्ह अंकित किया जाता है। उस प्रकार "स्वस्तिक" शब्द का अर्थ "अच्छा" या "मंगल" करने वाला।
📌 परीक्षा: RPSC (Drawing & Painting) 2013
- A. गुफा भित्ति पर
- B. कागज पर
- C. कपड़े पर
- D. केनवास पर
Explanation
प्रागैतिहासिक चित्र प्रायः खुरदरी चट्टानों की दीवारो गुफाओं के फर्शों, छतों या भित्तियों पर बनाये गये है। अनेक चित्र प्रस्तर शिलाओं पर भी प्राप्त हुए है। जहाँ गुफाओं की छतों व दीवारों पर 5000 ई. पू. के चित्र उत्कीर्ण है। शिकार के दृश्यों और जंगली पशुओं का अंकन है।
📌 परीक्षा: RPSC Assistant Prof. 2020 (1)
- A. पशु
- B. मानव
- C. पक्षी
- D. पशु-मानव-पक्षी
Explanation
प्रागैतिहासिककालीन चित्रों के विषय पशु, पक्षी, मानव, आखेट ही रहे हैं क्योंकि तत्कालीन मानव के जीवन में इन सभी तत्त्वों की ही प्रधानता थी।
📌 परीक्षा: TGT 2003
- A. पुरापाषाण काल
- B. मध्यपाषाण काल
- C. नवपाषाण काल
- D. ताम्रपाषाण काल
Explanation
पॉलिश किये हुए पत्थर के औजार या तराशे गये चमकीले पत्थरों के औजार नवपाषाण काल (नियोलिथिक युग) में प्रयोग किये जाते थे जिसकी शुरूआत मध्य पूर्व में 9500 ई.पू. के आस-पास हुई थी। जिसे पारस्परिक रूप से पाषाण युग का अन्तिम हिस्सा माना जाता है। नव पाषाण काल में जंगली और घरेलू फसलों का उपयोग और पालतू जानवरों का इस्तेमाल किया जाता था। 9500-9000 ई.पू. तक लेवंट में कृषक समुदाय का जन्म हुआ। मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होने लगा।
📌 परीक्षा: UP TGT 2021
- A. पूर्व पाषण काल
- B. सिन्धु सभ्यता
- C. मध्य पाषाण काल
- D. नव पाषण काल
Explanation
'मिट्टी के बर्तनों' का आविष्कार सर्वप्रथम 'नवपाषाण' काल में हुआ था। उत्खनन में विभिन्न आकार-प्रकार के मिट्टी के बर्तन तथा बहुसंख्यक मात्रा में इनके टुकड़े पाये गये है। बर्तन हस्त और चाक दोनों प्रकार से बनाये जाते थे। सैंधव मृदभाण्ड मुख्यतः लाल या गुलाबी रंग के बने होते थे। कुछ को लाल रंग से पोतकर काली रेखाओं से चित्र बनाये गये है। बर्तनों को भट्ठों में भली-भाँति पकाया जाता था।
* नवपाषण काल में मनुष्य पत्थरो के यन्त्रों पर पॉलिश करता था और चाक पर बने मिट्टी के बर्तनो का प्रयोग करता था।
* नव पाषाण युग (उत्तर पाषाण युग) के मानव ने सर्वप्रथम चित्र कला का प्रयोग किया।
📌 परीक्षा: RPSC (Drawing & Painting) 2018, T.G.T. -2011
- A. पुरापाषाण युग
- B. मध्यपाषाण युग
- C. नवपाषाण युग
- D. इनमें से कोई नहीं
Explanation
नवपाषाण काल (10,000 ई.पू. से 5000 ई.पू. या 3000 ई.पू.)
* नवपाषाण काल का मानव खाद्य संग्राहक न होकर खाद्य उत्पादक बन गया था।
* कृषि का आविष्कार कर लिया था जिसके कारण मानव में स्थाई निवास की प्रवृत्ति का विकास हुआ और स्थाई घर बनाकर रहने लगा था।
* पहिये का आविष्कार तथा मिट्टी के बर्तन बनाने का प्रारम्भ भी नवपाषाण काल से ही हुआ।
* पत्थर के औजारों में पॉलिस लगाने का आविष्कार भी नवपाषाण काल से ही हुआ।
* पुरापाषाण काल का मानव शिकारी एवं खाद्य संग्राहक था। पुरापाषाण काल का मानव को पशुपालन व कृषि ज्ञान का आभाव था।
* पशुपालन का प्रारम्भमध्य पाषाण काल से माना जाता है।
📌 परीक्षा: RPSC Assistant Prof. 2020 (1)
- A. धर्म
- B. विज्ञान
- C. गणित
- D. ज्योतिष शास्त्र
Explanation
भारत में कलाओं का जन्म धर्म से होता है। इस लिये भारतीय कला धर्म प्रधान मानी जाती है।
📌 परीक्षा: BHU Art 2012
- A. गेरुआ
- B. काला
- C. श्वेत
- D. नीला
Explanation
प्रागैतिहासिक कालीन चित्रों में प्रधानतया गेरुए रंग का प्रयोग हुआ है। इस काल के अधिकांश चित्र क्षेपांकन पद्धति से बने हैं।
📌 परीक्षा: TGT 2003
- A. होशंगाबाद
- B. मिर्जापुर
- C. आदमगढ़
- D. उक्त सभी
Explanation
प्रागैतिहासिक काल को तीन भागों में बाँटा गया है।
* पूर्वपाषाण काल 30,000 ई.पू. - 25000 ई.पू.
* मध्यपाषाण काल 25000 ई.पू. - 10,000 ई.पू.
* उत्तर पाषाण काल (नव पाषाण काल) 10000 ई.पू. - 5000 ई.पू.
भारत में प्रागैतिहासिक चित्रों के प्रमुख केन्द्र:
* मिर्जापुर (उ.प्र.) सोरहोघाट, लिखुनियाँ, भल्डरिया, विजय, घोडमंगर कण्डाकोट, कोहवर, खोडहवा
* मानिकपुर बाँदा (उ०प्र०) सरहाट, कर्षरिया, करियाकुंड
* मध्य प्रदेश पंचमढ़ी, होशंगाबाद, सिंहनपुर, भीम वेटका, रायगढ़ (छत्तीसगढ़) पहाड़गढ़ (उ.प्र.)
* द. भारत के केन्द्र विल्ला सरंगम (तमिलनाडु) बेल्लारी (कर्नाटक) वायनाड के एडकल (केरल)
* झारखण्ड- चक्रधरपुर
📌 परीक्षा: RPSC Assistant Prof. 2020 (1)
- A. लकड़ी के पटों पर
- B. वृक्ष की छालों पर
- C. ताल पत्रों पर
- D. चट्टानों पर
Explanation
प्रागैतिहासिक काल की भारतीय चित्रकला की सतह चट्टानों पर बनाई गई है। चट्टानों और गुफाओं में अंकित दृश्यों को देखकर यह ज्ञात होता है कि मनुष्य ने अपनी चेष्टाओं, रुचियों और आकांक्षाओं को प्रकट करने के लिए ललित कलाओं का प्रयोग किया।
📌 परीक्षा: TGT 2005
- A. भीमबेटका
- B. सांची
- C. बेल्लूर
- D. महाबलीपुरम
Explanation
भारत में पूर्व ऐतिहासिक गुफाएँ भीमबेटका है।
* भीमबेटका की खोज 1957-58 ई. में उज्जैन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विष्णुधर वाकणकर को प्राप्त है।
ज्यादा जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें :-
भीमबेटका गुफाओं का इतिहास, खोज और रोचक तथ्य | Bhimbetka Caves History in Hindi
📌 परीक्षा: Haryana TGT 2018
- A. पुरा पाषाण काल
- B. मध्य पाषाण काल
- C. नव पाषाण काल
- D. ताम्र पाषाण काल
Explanation
"तराशे गये चमकीले पत्थरों के औजारों " का प्रयोग "नव पाषाण काल" या "उत्तर पाषाण काल" में किया गया।
* नवपाषाण कालीन मानव "पॉलिशदार पत्थर के बने हथियारों का" प्रयोग करते थे。
* नवपाषाण कालीन मानव सर्वाधिक "पत्थर की बनी कुल्हाड़ी" का प्रयोग किया।
* "पॉलिस" लगाने की कला का आरम्भ "नवपाषाण युग" से हुआ।
📌 परीक्षा: PGT-2016
- A. नीले
- B. सफेद
- C. लाल
- D. पीले
Explanation
उत्तर काशी के हुडली गुफा से प्राप्त शैल चित्रो में नीले रंग का प्रयोग किया गया है। उत्तराखण्ड राज्य में चित्रकला के सबसे प्राचीनतम नमूने शैल चित्र (Rock Painting) के रूप में लाखु, ग्वारख्या, किमनी गांव, ल्वेथाम, हुडली, पेटशाल, फलसीमा आदि गुफाओं में देखने को मिलते हैं।
📌 परीक्षा: UKSSSC LT 2020
- A. कपड़ा
- B. शिला
- C. कागज
- D. केनवास
Explanation
प्रागैतिहासिक काल में आदिमानव शिलाओं पर चित्र बनाते थे इसके तहत पशुओं के आखेट करते कुछ व्यक्तियों के चित्र है जिससे मनोरंजन भी होता प्रतीत होता है। इसके अतिरिक्त आदि मानवों के अन्य कृतियाँ भी मिलती है देश के विभिन्न भागों से आदिमानवों द्वारा चित्रित चित्र मिले हैं जिसमें भीमबेठका, होशांगाबाद आदि है।
📌 परीक्षा: TGT 2011
- A. गेरू
- B. रामरज
- C. खड़िया
- D. अल्ता
Explanation
आलता रंग मिट्टी से नहीं बनता। प्राकृतिक तरीके से तैयार आलता सेहत के लिये फायदेमंद होता है इसका निर्माण पान के पत्ते या कच्ची लाख को पीसकर पानी में उबालकर किया जाता है। गेरू, रामरज, खडिया रंग जमीन से प्राप्त किये जाते है मिट्टी के रंग है। प्रोगैतिहासिक काल में गेरू, खडिया व कोयला रंग का प्रयोग किया गया है।
📌 परीक्षा: BHU Art 2010
- A. चित्रकला
- B. चट्टान चित्रकारी
- C. स्क्रॉल (Scroll) चित्रकारी
- D. भित्तिचित्र
Explanation
भारतीय चित्रकला का उद्भव "चट्टान चित्रकारी" से हुआ है। भारत में चित्रकला का इतिहास बहुत पुराना रहा है। पाषाण काल में ही मानव ने गुफा चित्रण करना शुरू कर दिया था। होशंगाबाद और भीमबेटका क्षेत्रों में कन्दराओं और गुफाओं में मानव चित्रण के प्रमाण मिले है। इन चित्रों में शिकार, शिकार करते है मानव समूहों, स्त्रियों तथा पशु पक्षियों आदि के चित्र मिले है। भारतीय चित्रकला के साक्ष्य मध्य भारत की कैमूर श्रृंखला, विंध्य पहाडियों, और उत्तर-प्रदेश के कुछ स्थानों की कुछ गुफाओं की दीवारों पर मिलते है।
📌 परीक्षा: Haryana TGT 2019
- A. रेखा-प्रधान
- B. छाया-प्रकाश
- C. भावहीन
- D. इनमें से कोई नहीं
Explanation
भारतीय चित्र कला रेखा-प्रधान है, उसमें गति है। रेखाओं द्वारा वाह्य सौन्दर्य के साथ-साथ गम्भीर भाव भी कलाकार ने चित्रों में बड़ी कुशलता से दर्शाएँ है। रेखा द्वारा गोलाई, स्थितिजन्यलघुता, परिप्रेक्ष्य इत्यादि सभी कुछ प्रदर्शित है。
📌 परीक्षा: MP (PCS) Assistant Prof. 2017
- A. (अ)-(ii), (ब)-(iv), (स)-(iii), (द)-(i)
- B. (अ)-(iv), (ब)-(i), (स)-(ii), (द)-(iii)
- C. (अ)-(iii), (ब)-(ii), (स)-(iv), (द)-(i)
- D. (अ)-(iv), (ब)-(ii), (स)-(i), (द)-(iii)
Explanation
(अ) ए. के. कुमारस्वामी - (iv) डांस ऑफ शिवा
(ब) मनोहर कौल - (i) ट्रेड्स इन इण्डिया पेन्टिंग
(स) ए. एच. ब्राड्रिक - (ii) फ्रीहिस्टोरिक पेंटिंग
(द) डी. एच. गार्डेन - (iii) इण्डियन रॉक पेन्टिंग
📌 परीक्षा: RPSC (Drawing-I) 2014
- A. सर जॉन मार्शल
- B. डी. एच. गार्डन
- C. स्टुअर्ट पिगाट
- D. सर अलेक्जेन्डर कनिंघम
Explanation
सर अलेक्जेन्डर कनिंघम ब्रिटिश सेना के बंगाल इंजीनियर ग्रुप में इंजीनियर थे, जो बाद में भारतीय पुरातत्व ऐतिहासिक भूगोल तथा इतिहास के प्रसिद्ध विद्वान के रूप में प्रसिद्ध हुए, इनको भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का जनक माना जाता है। इनका जन्म 23 जनवरी 1814 लंदन यूनाइटेड किंगडम में हुआ था एवं मृत्यु 1893 यूनाइटेड किंगडम में हुआ था।
📌 परीक्षा: RPSC (Drawing-I) 2014
- A. (A) गलत है, (R) सही है।
- B. (A) गलत है, (R) गलत है।
- C. (A) सही है (R) सही है।
- D. (A) सही है (R) गलत है।
Explanation
प्रागैतिहासिक शैल चित्रों में सर्वाधिक आखेट/शिकार के चित्र प्राप्त हुए हैं। आदि मानव ने सांभर, महिष, गैण्डा, हाथी, बारहसिंगा, घोड़ा, खरगोश, सुअर जैसे पशुओं का स्वाभाविकता के साथ अंकन किया है। यह पशु उसने अपने आखेट में देखे थे तथा उसने इन पशुओं की गति और शक्ति पर विजय प्राप्त की थी, इस कारण उसके प्रमुख चित्रण विषय के रूप में पशु जीवन का आना स्वाभाविक है। प्रागैतिहासिक शैल चित्रों में अधिकतर शिकार के दृश्यों और जंगली पशुओं का अंकन है, क्योंकि प्रागैतिहासिक मानव का जीवन जंगल में शिकार पर ही आश्रित था। अभिकथन (a) और कारण (R) दोनों सही है।
📌 परीक्षा: UGC June. 2012 IIIrd paper
- A. खनिज रंग
- B. मिट्टी के रंग
- C. रासायनिक रंग
- D. वानस्पतिक रंग
Explanation
गुफा मानव लोग भित्ति चित्रण के लिये मिट्टी के रंग का प्रयोग करते थे। जिनमें अधिकांश गेरूआँ रंग का प्रयोग हुआ है। इन रंगों को स्थायी बनाने के लिए जानवरों की चबीं में मिलाकर चित्रों में लगाये।
- A. प्रतीकात्मक
- B. यथार्थवादी
- C. आदर्शवादी
- D. अतियथार्थवादी
Explanation
भारतीय कला के प्रारम्भिक गुफा चित्रो में प्रतीकात्मक रेखा चित्र है। भारतीय कला की एक विशेषता उसकी प्रतीकत्मकता में निहित है। प्रतीक प्रस्तुत और स्थूल पदार्थ होता है। जो कि अप्रस्तुत सूक्ष्म भाव का अनुभूति का मानसिक आविर्भाव करता है।
* स्वास्तिक की चार आड़ी खड़ी रेखाएँ चार दिशाओं की चार लोकों की, चार प्रकार की सृष्टि की तथा सृष्टिकर्ता चतुर्मुख ब्रह्मा का प्रतीक है। इसकी आड़ी और खड़ी दो रेखाओं और उसके चारों सिरों पर जुड़ी चार भुजाओं को मिलाकर सूर्य की छः रश्मियों का प्रतीक माना गया है।
* उदाहरण के लिए कलाकार ने बौद्ध धर्म में बुद्ध की आकृति के स्थान पर कमल बना दिया था। रंगो के द्वारा भी कलाकार ने प्रतीकात्मक का आभास कराया है। जल रंग चित्रो का आरंभ गुफा चित्रो से होता है।
📌 परीक्षा: MP (PCS) Assistant Prof. 2017
- A. अनुभूतियों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति
- B. जानवरों की गतिविधि
- C. विभिन्न आकृतियाँ
- D. इनमें से कोई नहीं
Explanation
प्रागैतिहासिक काल के कलाकार की रेखाओं में जादुई भावनाओं का आनन्द और मत्र-मुग्ध कर देने के समस्त गुण थे। रेखाओं में गति शक्ति का संपुजन ऐसा था मानो शिलाश्रयों में बैठा कोई आधुनिक कलाकार किसी जनजाति के चित्र बना रहा हो। मनुष्य अपनी मूक भावनाओं को अनगढ़ पत्थरों के यंत्रों तथा तुलिका से टेढ़ी-मेढ़ी रेखा कृतियों को गुफाओं और चट्टानों की भित्तियों पर अंकित कर दिया। मानव ने इस चित्रों में रेखाओं और आकारों द्वारा अपनी आत्मा एवं प्रगति को अंकित किया है और बहुत कम रेखाओं में अपने अनुभूतियों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति किया है।
📌 परीक्षा: RPSC Assistant Prof. 2020 (1)
- A. पशुओं के चित्र
- B. आखेट के चित्र
- C. मनुष्यों के चित्र
- D. औजारों के चित्र
Explanation
प्रागैतिहासिक काल के चित्रों में सबसे अधिक चित्रण "आखेट के चित्रों' का चित्रण किया गया है। सर्वप्रथम शिलाचित्रों की खोज आर्चविल्ड कालाईल तथा जान काकबर्न ने किया। जगत प्रसिद्ध "ऊँट" का चित्र मडहारिया से प्राप्त हुआ है। घायल सुअर का चित्र भल्डारिया से मिलता है। गैंडे के आखेट का चित्र घोड़ा मंगर से मिला है। बाहरसिंह का आखेट का चित्र लिखुनिया से मिला है। स्वास्तिक पूजा का श्रेष्ठ चित्र बनिया बेरी (पंचमढ़ी) से प्राप्त हुआ है।
📌 परीक्षा: BHU Art 2011
- A. बारोक कला
- B. पूर्व ऐतिहासिक कला
- C. पुनर्जागरण कला
- D. रोक्को कला
Explanation
प्रागैतिहासिक काल के मानव की 'संस्कृति एवं सभ्यता' का कोई लिखित विवरण न होने के कारण उनके द्वारा बनाये गये चित्र या आलेखन ही उनके विचारों के आदान-प्रदान एवं संस्कृति का संवाहन था। इस समय को पूर्व ऐतिहासिक काल भी कहा जाता है। जिसे पुरातत्ववेत्ताओं ने चार भागों में बाँटा है ऑरिग्नेशियन, पैरीगार्डियन, सौल्युद्धियन तथा मैण्डेलेनियम युग। इस समय की कला को पूर्व ऐतिहासिक काल की कला कहा जाता है।
📌 परीक्षा: PGT 2003
- A. (A) गलत और (R) सही है
- B. (A) सही और (R) गलत है
- C. (A) और (R) दोनों सही है
- D. (A) और (R) दोनों ही गलत है
Explanation
प्रागैतिहासिक काल को चित्रकला की दृष्टि से तीन भागों में विभाजित किया गया है-
1. पूर्व पाषाण काल (30,000 ई. पू. से 25,000 ई. पू.)
2. मध्य पाषाण काल (25,000 ई. पू. से 10,000 ई. पू.)
3. उत्तर पाषाण काल (10,000 ई. पू. से 3000 ई. पू.)
* इस युग के मानव प्रकृति निर्मित गुफाओं में रहता था तथा पत्थर हड्डी और लकड़ी के औजार या हथियार बनाता था। ये अवशेष प्रायः पशुओं के अस्थियों से प्राप्त हुए है। भारत में सर्वप्रथम ब्रुसफूट नामक विद्वान ने प्रस्तर युग के औजार की खोज मद्रास के समीप पल्लावरम् नामक स्थान में की थी। इसके पश्चात प्रस्तर युग के अन्य स्थान जैसे-सोऔं, नर्मदा, साबरमती नदी, की घाटियों से मिले है।
* 1863 ई. पू. मद्रास के समीप पूर्व 'प्रस्तर युग' के एक कला पूर्ण शिलाखण्ड का पता लगा था। इसी प्रकार 1880 ई. में मिर्जापुर से पंख पोशाक युक्त अनेक चित्र खुदी चट्टानों पर मिले है जो प्रागैतिहासिक महत्व के है। अर्थात अभिकथन (A) तथा (R) दोनों सही है।
📌 परीक्षा: RPSC (Drawing-I) 2014
- A. गेरू
- B. हरा
- C. पीला
- D. बैंगनी
Explanation
प्रागैतिहासिक चित्रों में 'गेरू' रंग का प्रयोग किया गया है।
* चित्र प्रायः लाल (गेरू एवं हिरौंजी), काले (कोयला या काजल), सफेद खड़िया रंगों से बने है। इन रंगों को तैयार करने से पूर्व इन्हें पशुओं की चर्बी में मिलाया जाता था।
* प्रागैतिहासिक चित्र प्रायः खुरदरी चट्टानों की दीवारों, गुफाओं फशों, छतों या भित्तियों पर बनाये गये है। अनेक चित्र प्रस्तर शिलाओं पर भी प्राप्त हुए हैं।
📌 परीक्षा: BHU Art 2015
- A. बाड़िक
- B. पिगॉट
- C. डी.एच. गार्डनर
- D. डब्ल्यू. एण्डरसन
Explanation
पंचमढ़ी के चित्रों की खोज डी.एच. गार्डनर के द्वारा की गई थी।
* पंचमढ़ी यह स्थान महादेव पर्वत श्रृंखला में अवस्थित है। पंचमढ़ी के आसपास कोई 5 मील के घेरे में 50 के करीब गुफाएँ हैं इन सभी में महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक चित्र उपलब्ध हुए है।
* पंचमढ़ी क्षेत्र के चित्रों को प्रकाश में लाने का श्रेय 'डी.एच. गार्डनर' नामक विद्वान को है, जिन्होंने सन् 1936 ई. में यहाँ के चित्रों के सम्बन्ध में रेखाचित्रों तथा फलक चित्रों सहित एक विशद लेख प्रकाशित किया जिसमें उन्होंने 15 से अधिक शिलाश्रयों एवं गुफाओं की खोज की। यही पर महादेव पर्वत के चारों और अवस्थित 'इमली खोंह' में सांभर के आखेट का दृश्य, 'भाडादेव गुफा' की छत पर शेर के आखेट का दृश्य और 'महादेव व बाजार' में विशालकाय बकरी का चित्र प्राप्त हुआ है।
📌 परीक्षा: UK PSC Lecturer 2020 (Mains)
- A. 10000 ई. पू. से 50 ई. तक
- B. 30000 ई. पू. से 50 ई. तक
- C. 500 ई. पू. से 50 ई. तक
- D. 2000 ई. पू. से 20 ई. तक
Explanation
आदिमानवों द्वारा प्रारम्भ की गई कला को आदि काल की चित्रकला कहा जाता है। जिसका समय 30000 ई. पू. से 50 ई. तक माना जाता है।
📌 परीक्षा: PGT 2010
- A. पुरा पाषाण काल में
- B. मध्य पाषाण काल में
- C. नव पाषाण काल में
- D. आधुनिक काल में
Explanation
प्रागैतिहासिक काल के चित्रों की खोज 1880 ई. में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में सबसे पहले की गई। उसके बाद भारत में कई स्थानों पर चित्रों की खोज हुई। जिनमें सबसे अधिक चित्र नव-पाषाण काल के पाये गये हैं।
📌 परीक्षा: PGT 2010
- A. हाथी, जंगली सांड और बाघ की
- B. भाले के साथ शिकार करते मानव
- C. मेंढक और सांप
- D. जेबरा और बकरी
Explanation
पुरा-पाषाण काल के दौरान भीमबेटका गुफा में बने चित्र "हाथी, जंगली सांड और बाघ" के है।
* भीमबेटका गुफा में पहले स्तर के चित्रों में "शिकार नृत्य", "हिरण", "बारहसिंगा", "सुअर", "रीछ", "जंगली भैंसे", "घोड़े", "हाथी", "अस्त्रधारी घुड़सवार"।
ज्यादा जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें :-
भीमबेटका गुफाओं का इतिहास, खोज और रोचक तथ्य | Bhimbetka Caves History in Hindi
📌 परीक्षा: TGT 1999, TGT 2009, PGT 2014, TGT-2016
- A. बेसिल ग्रे
- B. स्टुअर्ट पिगाट्ट
- C. डी. एच. गार्डन
- D. अजीत घोष
Explanation
भारत में प्रोगैतिहासिक आलेखनों एवं चित्रों का अनुशीलन करने वाले इन विद्वानों में एलन ह्वाटन ब्राड्रिक; तथा स्टुअर्ट पिगाट्ट है। स्टुअर्ट पिगाट्ट की पुस्तक प्रि-हिस्टोरिक इंण्डिया जिसमें प्रोगैतिहासिक चित्रों की प्राचीनता का विश्लेषण करते हुये भारत में इसका प्रमाणिक स्थान भी दिया गया है।
📌 परीक्षा: RPSC (Drawing-1) 2014
- A. आखेट के चित्र
- B. औजारों चित्र
- C. मनुष्यों के चित्र
- D. इनमें से कोई नहीं
Explanation
प्रागैतिहासिक काल के चित्रों में सबसे अधिक चित्र 'आखेट' के मिले है।
* आदिम मनुष्य के चित्रो की प्रमुख विषय-वस्तु आखेट रही है। उसने बारहसिंगा, महिष, हाथी, घोड़ा, सुअर, गैंडा, भालू, हिरण, बैल, गाय, चीता, भैंसे, जिराफ जैसे पशुओं को शिकार करते हुए चित्रित किया है।
* भारत वर्ष में प्रागैतिहासिक चित्रों की सर्वप्रथम खोज मिर्जापुर के कैमूर पहाड़ियो में की गयी। प्रागैतिहासिक चित्रों की खोज अंग्रेजों ने की।
* भारत में प्रागैतिहासिक शैल चित्रों की की खोज सर्वप्रथम 'आचोंवाल्ड कार्ललाइल' 1880 ई. में तत्पश्चात काकबर्न ने 1883 ई. में की।
📌 परीक्षा: MP (PCS) Assistant Prof. 2017
- A. (A) सही नहीं है और (R) सही है।
- B. (A) और (R) दोनों गलत हैं।
- C. (A) और (R) दोनों सही है
- D. (A) सही है (R) सही नहीं है।
Explanation
अभिकथन में यह स्पष्ट है कि पूर्व पाषाण युग में लोगों ने मिश्र धातु की खोज कर ली थी। सही नहीं है। जबकि दिया तर्क उनके उत्कीर्ण करने वाले उपकरण या तो नुकीली चट्टानें थी या उनमें मूल स्थिति की तुलना में कुछ परिवर्तन किया गया था, सही है।
📌 परीक्षा: UGC July 2016 IInd paper
- A. गुजरात
- B. महाराष्ट्र
- C. दिल्ली
- D. जयपुर
Explanation
भारतीय चित्रकला का प्राचीन केंद्र मध्य प्रदेश (होशंगाबाद एवं भीमबेटका) है किन्तु दिए गए विकल्पों में मध्य प्रदेश न होने के कारण निकटतम उत्तर महाराष्ट्र (अजंता) होगा।
📌 परीक्षा: TGT 2009
- A. बिहारी में
- B. उत्तर प्रदेश में
- C. महाराष्ट्र में
- D. छत्तीसगढ़ में
Explanation
* "रायगढ़" पूर्व ऐतिहासिक कला केन्द्र छत्तीसगढ़ राज्य का प्रमुख जनपद है।
* छत्तीसगढ़ राज्य से पूर्व "रायगढ़" मध्य प्रदेश का प्रमुख जनपद था।
* रायगढ़ में स्थित गुफा "बौतालदा गुफा" से "हिरण", "छिपकली", "जंगली भैसों", "जंगली भैंसे का शिकार करते मानवाकृतियाँ", "नाचते", "युद्ध करते", "पालतू पशुओं के सजीव चित्र है। ये चित्र गेरु तथा रामराज जैसे भूरे रंगों से बने हैं।
* रायगढ़ रियासत में "माँठ नदी" के किनारे स्थित "सिंघनपुर गुफा से प्राप्त चित्र, सिंघनपुर गुफा के द्वार पर, असंयत कंगारू" के चित्र, "घोड़ा", "बारहसिंगा", "हिरण", "भैंसा", "सांड", "सूँड़ उठाये हाथी", "खरगोश", "जंगली सांड को पकड़ते हुये", "बर्डी से छेदते हुये आखेटकों", "घायल भैंसा बुरी तरह तीरों से बिंधा हुआ दम तोड़ रहा है।"
* रायगढ़ क्षेत्र में प्राप्त गुफाएँ- कबरा पर्वत, करमागढ़, खैरपुर, बोतालदा में अनेक शिलाश्रय गुफाएँ प्राप्त हुई है।
📌 परीक्षा: TGT-2016
- A. अलेक्जेंडर कनिघम
- B. जेरोम जैकबसन
- C. वी. एस. वाकणकर
- D. वी. एन. मिश्र
Explanation
भीमबेटका गुफा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 60 किलोमीटर दक्षिण में भीमबेटक नामक पहाड़ी पर स्थित है।
* इस गुफा की खोज 1957-1958 ई. में उज्जैन विश्व विद्यालय के प्रोफेसर विष्णु श्रीधर वाकणकार ने किया था। यहाँ पर 600 गुफाएँ मिली हैं और 275 गुफा में चित्र मिले हैं, भीम बेटका गुफा लोककला की छवि प्रस्तुत करती है।
* भीम बेटका गुफा में दो स्तर के चित्र मिले है।
* अलेक्जेंडर कनिंघम की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का जनक माना जाता है।
* भीम बेटका को रॉक सेल्टर नाम से जाना जाता है。
📌 परीक्षा: UP Higher Asst. Prof. 2021
- A. आध्यात्म
- B. ज्योतिष
- C. अंध विश्वास
- D. सम्प्रदाय
Explanation
तन्त्र परम्परा से जुड़े हुये आगम ग्रन्थ है, तन्त्र शब्द के अर्थ बहुत विस्तृत है, तन्त्र परम्परा एक हिन्दू एवं बौद्ध परम्परा तो है ही, जैन धर्म, सिख धर्म, तिब्बत की बोन परम्परा आदि में है। भारतीय परम्परा में किसी भी व्यवस्थित ग्रन्थ सिद्धान्त, विधि, उपकरण। तकनीक या कार्य प्रणाली को भी तन्त्र कहते है। तन्त्र कला का सम्बन्ध अध्यात्म से है।
📌 परीक्षा: BHU Art 2016
- A. प्रागैतिहासिक चित्रों का मुख्य विषय शिकार रहा है
- B. प्रागैतिहासिक चित्र गुफावासियों द्वारा बिना किसी कला- दक्षता के बनाये गये है
- C. प्रागैतिहासिक चित्रों में दमकता लाल, चमकीला नीला एवं प्रफुल्ल हरा रंग भरा गया है
- D. मानव व पशु आकृतियों को बनाने से पहले गुफा की भित्तियों पर पृष्ठ-भूमि में कहीं कोई रंग की तह नहीं लगाई गई है
Explanation
प्रागैतिहासिक चित्रों का विषय शिकार (आखेट) से सम्बन्धित है तथा इनके रंग में गेरूवे रंग का प्रयोग किया गया है। इन चित्रों का धरातल गुफाओं एवं चट्टानों की दीवार एवं छत थे।
📌 परीक्षा: PGT 2003
- A. पेस्टल
- B. भूमिज रंग
- C. जल रंग
- D. इनमें से कोई नहीं
Explanation
प्रागैतिहासिक काल से ही गेरू रंग का प्रयोग किया जा रहा है। जो भूमि से प्राप्त किया जाता है। अतः इसे भूमिज रंग भी कहते है। प्रागैतिहासिक कालीन चित्रों में अधिकांश गेरूए रंग का प्रयोग किया गया है।
📌 परीक्षा: PGT 2014
- A. मंदिरों हेतु
- B. प्रागैतिहासिक शैल चित्रों के लिए
- C. मूर्तिकला के लिए
- D. म्यूरल हेतु
Explanation
'सिघंनपुर' स्थान प्रागैतिहासिक शैल चित्रों के लिए प्रसिद्ध है।
* सिंघनपुर के चित्रों की खोज सन् 1910 ई. में डब्ल्यू. एण्डर्सन ने की उसके बाद सन् 1913 ई. में अमरनाथ ने व सन् 1917 ई. में पर्सी ब्राउन ने इन चित्रों का परिचय दिया।
* सिंघनपुर में गुफा के द्वार पर 'असंयत कंगारु' के चित्र चित्रित है।
इस प्रश्न के बारे मे विस्तृत जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें
📌 छत्तीसगढ़ के प्रागैतिहासिक चित्र: सिंघनपुर की गुफाओं का रहस्य और इतिहास
📌 परीक्षा: Haryana TGT 2018
- A. आधुनिक कला
- B. मध्यकालीन कला
- C. सिन्धुघाटी सभ्यता की कला
- D. ऐतिहासिक काल के पूर्व की कला
Explanation
प्रागैतिहासिक कला का अर्थ है इतिहास के पूर्व की कला। जिसका हमें कोई लिखित प्रमाण नहीं मिलता इसका समय 30,000 BC से 3000 BC तक माना जाता है।
📌 परीक्षा: PGT 2005
- A. के. वेंकटप्पा
- B. हेरिंगम
- C. कनिंघम
- D. ई. वी. हैवल
Explanation
सर अलेक्जेंडर कनिंघम का जन्म इग्लैंड में सन् 1814 ई. के हुआ था। ब्रिटिश सेना के बंगाल इंजीनियर ग्रुप में इंजीनियर थे। जो बाद में भारतीय पुरातत्व, ऐतिहासिक भूगोल तथा इतिहास के प्रसिद्ध विद्वान के रूप में प्रसिद्ध है। इनको भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का जनक माना जाता है। और 1861 में भारत में प्रथम पुरातत्व निदेशक बनाये गये।
📌 परीक्षा: RPSC (Drawing) 2015
- A. सर जॉन मार्शल
- B. सर अलेक्जेंडर कनिंघम
- C. स्टेला क्रेमरिश
- D. के. एन. दीक्षित
Explanation
भारतीय पुरातत्व विभाग के जनक सर अलेक्जेंडर का जन्म 1814 ई. में लंदन में हुआ और मृत्यु 1893 ई. में हुई। कनिंघम ब्रिटिश सेना के बंगाल इंजीनियरिंग ग्रुप में इंजीनियर थे जो बाद में भारतीय पुरातत्त्व, ऐतिहासिक भूगोल तथा इतिहास के प्रसिद्ध विद्वान के रूप में प्रसिद्ध हुए। इनकों भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का जनक माना जाता है। भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना 1861 ई. में हुई। भारतीय पुरातत्व विभाग का मुख्यालय नई दिल्ली में है।
📌 परीक्षा: KVS 22.12.2018, TGT-2016, UGC Sep. 2013 IInd paper, DIET Pravakta-2016
- A. शैल चित्र
- B. फ्रेस्को चित्र
- C. मूर्तिशिल्प
- D. सभी तीन प्रकार के
Explanation
'भीम बेटका' में शैल चित्र पाये जाते है। 'भीम बेटका' की गुफाएँ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 60 किमी दूर दक्षिण में भीम बेटका नामक नामक पहाड़ी पर स्थित है यह 30,000 ई० पू० से 10,000 ई. पू. की है।
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भीमबेटका गुफाओं का इतिहास, खोज और रोचक तथ्य | Bhimbetka Caves History in Hindi
📌 परीक्षा: UP PGT 2021
- A. गुफाओं में रंगे गये चित्र
- B. गुफाओं में उकेरे गये चित्र
- C. प्रकृति द्वारा किया गया अमूर्त चित्रण
- D. अभिलेख
Explanation
"पेट्रोग्लिफ" संदेश का प्राचीनतम् माध्यम निम्न में से गुफाओं में उकेरे गए चित्रों से संबंधित है।
📌 परीक्षा: TGT 2013
- A. अमूर्त
- B. रेखा-चित्रीय प्रदर्शन
- C. वर्णनात्मक
- D. धर्म निरपेक्ष
Explanation
भारतीय चित्रकला की पहचान वर्णनात्मक है। भारतीय चित्र कला की विशेषताएँ ई.पू. से भी ज्यादा पुरानी है। 7 वीं शताब्दी में अजन्ता और एलोरा गुफाओं की चित्रकारी भारतीय चित्रकारी का सर्वोत्तम उदाहरण है। प्रागैतिहासिक काल में भारतीयों ने जंगली जानवरों बारहसिंघा भालू, हाथी आदि का चित्र बनाना सीख लिया था।
📌 परीक्षा: DSSSB 27.08.2018
- A. बेलारी में
- B. सिंहनपुर में
- C. मिर्जापुर में
- D. इनमें से सभी
Explanation
प्रागैतिहासिक काल के उत्तर पाषाण काल से चित्रकला का प्रारम्भ माना जाता है। उत्तर पाषाण काल में चित्रों की खोज सबसे पहले 1880 ई. में मिर्जापुर में हुई थी। उत्तर पाषाण कालीन चित्रकला के प्रमुख केन्द्रों में मिर्जापुर, भीमबेटका, पंचमढ़ी, होशंगाबाद, बेलारी, सिंहनपुर आदि है।
📌 परीक्षा: PGT 2010
- A. तैल-पेस्टल्स से
- B. जल रंग से
- C. स्याही से
- D. गेरू व चारकोल से
Explanation
📌 परीक्षा: PGT 2000
- A. 5 हजार वर्ष
- B. 6 हजार वर्ष
- C. 2 हजार वर्ष
- D. 7 हजार वर्ष
Explanation
भारतीय चित्रकला का इतिहास पांच हजार वर्ष पुराना है, क्योंकि भारत में नवपाषाण का अन्त लगभग 3000 ई.पू. माना जाता है, लगभग यहीं से सैन्धव सभ्यता प्रारम्भ होता है। (कार्बन डेटिंग के अनुसार सैन्धव सभ्यता की तिथि 2350-1750 ई.पू. मानी जाती है। अमानतः 3000 ई.पू. में 200 वर्ष जोड़ने पर यह तिथि 5000 वर्ष हो जायेगी।)
* यूरोपीय चित्रकला का समय सात हजार वर्ष माना जाता है。
* कला का इतिहास सात हजार वर्ष माना जाता है।
📌 परीक्षा: TGT 2004
- A. (A) सही है परन्तु (R) गलत है।
- B. (A) गलत है, परन्तु (R) सही है।
- C. (A) और (R) दोनों सही है।
- D. (A) और (R) दोनों गलत है।
Explanation
भारतीय कला धर्म प्रधान होने के कारण प्रागैतिहासिक काल से ही धर्म या धार्मिक कर्मकाण्डों पर आधारित रही। परन्तु बीच में कुछ समय धर्म का स्थान राजदरबारों ने ले लिया था और अपने समय में हो रहे युद्ध एवं पारिवारिक परिवेश तथा दरबारी लोग ही इसके विषय बन चुके थे। लेकिन समय चक्र के अनुसार धर्म को आधार मानकर सभी राजवंशों ने मंदिरों, गुफाओं एवं पौराणिक ग्रन्थों का निर्माण करवाया तथा उनसे सम्बन्धित मूर्तियों एवं चित्रों का निर्माण करवाया।
📌 परीक्षा: UGC June, 2013 IIIrd paper
- A. धर्म
- B. लोक-जीवन
- C. प्रकृति
- D. भव्यता
Explanation
भारतीय कला का मूल प्रेरणा स्त्रोत 'धर्म' है。
* विश्व की सभी कलाओं का जन्म धर्म के साथ ही हुआ है। कला का उद्भव में धर्म का बहुत बड़ा हाथ है। धर्म ने ही कला के माध्यम से अपनी धार्मिक मान्यताओं को जन-जन तक पहुँचाया है। राष्ट्रीय जीवन के ही समान भारतीय कला का स्वरूप भी मुख्यत धर्म प्रधान है।
* विष्णुधर्मोन्तर पुराण के चित्रसूत्र में कहा है -
कलानां प्रवरं चित्रं धमार्थकाममोक्षदं।
मगल्यं प्रथमं चैतद् गृहे यत्र प्रतिष्ठितम ।।
* अजन्ता, बाघ आदि गुफाओं में बौद्ध धर्मप्रधान चित्रों का अंकन है। राजस्थानी, पहाड़ी शैलियों में कृष्णलीला विषयक अनेक रूपों का चित्रण हुआ है।
📌 परीक्षा: UK PSC Lecturer 2020 (Mains)
- A. आखेट
- B. पशु-पक्षी
- C. युद्ध
- D. उपरोक्त सभी
Explanation
जिस काल के इतिहास का लिखित विवरण नहीं मिलता है। वह प्रागैतिहासिक काल कहलाता है। प्रागैतिहासिक काल के मानवों की गुफाएँ भीमबेठका से मिलती है जिससे विभिन्न काल में की चित्रकारी देखने को मिलती है। उच्च पुरापाषाण कालीन चित्रों में भैंस, हाथी, बाघ, गैंडे तथा सूअर प्रमुख हैं। एकचित्र में एक पशु का आखेट करते हुए दिखाया गया है।
📌 परीक्षा: TGT 2011
- A. ग्रंथ चित्र
- B. गुहा चित्र
- C. कागज पर बने चित्र
- D. वस्त्र पर बने चित्र
Explanation
प्रागैतिहासिक काल के चित्रों के समस्त उदाहरण लाल, काले या पीले और सफेद रंगों से बने हैं। यह चित्र चट्टानों की दीवारों, गुफाओं के फर्शों, भित्तियों या छतों में बनाये गये हैं। प्रागैतिहासिक मानव ने पर्वतों की गुहाओं तथा कन्दराओं को अपना निवास बनाया था।
📌 परीक्षा: TGT 2003
- A. रेखा
- B. रंग
- C. रेखा-रंग
- D. प्रकृति
Explanation
प्रागैतिहासिक काल के कलाकार की रेखाओं में जादुई भावनाओं का आनन्द और मन्त्रमुग्ध कर देने के समस्त गुण थे। रेखाओं में गति व शक्ति का संपुजन ऐसा था की शिलाश्रयों में बैठा कोई आधुनिक कलाकार किसी जनजाति का चित्र बना रहा हो।
📌 परीक्षा: TGT 2003
- A. 2000 BC
- B. 4000 BC
- C. 6000 BC
- D. 1000 BC
Explanation
मध्य पाषाण काल (Mesolithic Age) मनुष्य के विकास का वह अध्याय है जो पुरा पाषाण काल और नवपाषाण काल के मध्य में आता है। इतिहास कार इस काल को 25,000 ई.पू. से लेकर 10,000 ई.पू. तक मानते हैं। पुरा पाषाण काल लगभग एक लाख वर्ष तक रहा उसके बाद मध्य पाषाण काल या मेसोलिथिक युग आता है।
नोट- एन.सी.आर.टी. में मध्य पाषाण काल के समय 9000 से 4000 वर्ष ई. पू. दिया गया है।
📌 परीक्षा: UP TGT 2021
- A. रीवा
- B. मैसूर
- C. पल्लावरम्
- D. टेनकानल
Explanation
भारत में सर्वप्रथम 'ब्रुसफुट' (1863ई.) नामक विद्वान ने प्रस्तर युग के औजार की खोज मद्रास के समीप 'पल्लावरम' नामक स्थान पर की थी।
* इसके अलावा प्रस्तर युग के अन्य स्थान जैसे सोआँ, नर्मदा, साबरमती नदी की घाटियों से मिले है, तथा उड़ीसा, मैसूर एवं मद्रास आदि भी ऐसे प्रान्त है जहाँ प्राचीन प्रस्तर युगीन औजार व हथियार मिले है।
* इस युग में आदि मानव प्रकृति निर्मित गुफाओं में रहता था तथा पत्थर, हड्डी लकड़ी के मोटे व भद्दे औजार एवं हथियार बनाता था।
📌 परीक्षा: RPSC (Drawing & Painting) 2018
- A. (A) गलत है, (R) सही है।
- B. (A) तथा (R) दोनों सही हैं।
- C. (A) सही है, (R) गलत है。
- D. (A) तथा (R) दोनों गलत है।
Explanation
प्रागैतिहासिक काल से ही कलाकारों के लिए प्रस्तर एक सर्वाधिक उपयुक्त अभिव्यंजना का माध्यम रहा है क्योंकि भावों की अभिव्यंजना के लिए यह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था और टिकाऊ था। अभिकथन (a) और कारण (R) दोनों सही है।
📌 परीक्षा: UGC Sep. 2012 IIIrd paper
- A. जॉन कार्लायल
- B. आर्चीवाल्ड कार्लाइल
- C. जेम्स फर्ग्युसन
- D. सी. डब्ल्यू. एन्डरसन
Explanation
भारत में प्रागैतिहासिक चित्रकला की खोज 'सर्वप्रथम अंग्रेजों ने की थी यह खोज भारत की कला, संस्कृति को समझने के लिए उन जिज्ञासुओं से प्रेरित होकर की गयी जो यहां पर शासन करने आये थे। ज्ञात तथ्यों के आधार पर जॉन काकबर्न और कार्लाइल को ही सर्वप्रथम शिला चित्रों की खोज का श्रेय जाता है। इन्होंने 1880 ई. में मिर्जापुर की पहाड़ियों में घोड़मंगर नामक स्थान पर शिला चित्र प्राप्त किए।
📌 परीक्षा: PGT 2011
- A. साँची
- B. अयोध्या
- C. भीमबेटका
- D. औरंगाबाद
Explanation
प्रागैतिहासिक चित्र भारत में भीमबेटका में पाये गये है
* भीमबेटका की खोज का श्रेय उज्जैन विश्विविद्यालय के प्रोफेसर 'वाकणकर' को है।
ज्यादा जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें :-
भीमबेटका गुफाओं का इतिहास, खोज और रोचक तथ्य | Bhimbetka Caves History in Hindi
📌 परीक्षा: UK PSC Lecturer 2020 (Mains)
- A. भू-दृश्य चित्रण
- B. व्यक्ति चित्रण
- C. पशु आखेट
- D. पौराणिक
Explanation
प्रागैतिहासिक चित्र जो प्राप्त हुए है वे नवपाषण काल के है। नवपाषण काल के मानव का प्रमुख केन्द्र बेल्लारी (कर्नाटक) था। 1892 में एफ. फासेट ने बेल्लारी नामक स्थान से दक्षिण भारत के प्रागैतिहासिक काल के शिलाखण्ड चित्रों की खोज की। जिसका धरातल शिलाखण्ड एवं विषय आखेट रहा। प्रागैतिहासिक चित्रों में अधिकांश गेरूए रंग का ही प्रयोग किया गया है। चित्रों को स्थाई बनाने के लिए जानवरों की चीं में रंग मिलाकर चित्रों पर लगाया जाता था इस समय के चित्रों में प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग किया गया है।
- A. जानवरों की चबीं में रंग मिलाकर
- B. खड़िया मिट्टी
- C. गेरु के रंग
- D. काला रंग
Explanation
चित्र प्रायः लाल (गेरू एवं हिरींजी) काले (कोयला या काजल), सफेद खड़िया रंगों से बने हैं। इन रंगों को तैयार करने एवं इस्तेमाल करने से पूर्व इन्हें पशुओं की चबीं में मिलाया जाता था।
📌 परीक्षा: TGT 2009
- A. पशु
- B. पक्षियाँ
- C. मानव आकृति
- D. नृत्य से जुड़े चित्र
Explanation
भारत की प्रागैतिहासिक चित्र कला में पशुओं के चित्र अधिक बनाये गये। आदिम मनुष्य की चित्रों के प्रमुख विषय आखेट था। उसने बारहसिंगा, महिष, हाथी, घोड़ा, सुअर, गैडा, भालू, हिरण, बैल, गाय, चीता, भैसे, जिराफ जैसे पशुओं का शिकार करते हुए चित्रित किया गया है।
📌 परीक्षा: BHU Art 2018
- A. कला
- B. साहित्य
- C. कलाकार
- D. कला-साहित्य
Explanation
एक सफल शैक्षणिक पाठ्यक्रम में कला व साहित्य का विशेष महत्व है।
📌 परीक्षा: TGT 2003
This Quiz is specially made for all those students who preparing for TGT/PGT/LT Grade/GIC/GDC/DIET/DSSSB/RPSC/KVS/NVS/ Polytechnic Lecturer/Jharkhand TGT/Haryana/Rajasthan School/College Lecturer/ Degree College /NTA UGC NET/JRF /Assistant Professor/SET BHU Exams
