किस मौर्योत्तर कालीन राजा ने 'त्रि-समुद्र-तोय-पीत-वाहन' की उपाधि ली थी?
इसका अर्थ है 'वह जिसके घोड़ों ने तीन समुद्रों (बंगाल की खाड़ी, अरब सागर, हिंद महासागर) का पानी पिया हो'—जो उसके साम्राज्य विस्तार को दर्शाता है।

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