Uncategorized बौद्ध धर्म में ‘क्षणिकवाद’ (Doctrine of Impermanence) का क्या अर्थ है? Last updated: January 9, 2026 4:00 pm Admin Share 0 Min Read SHARE बौद्ध धर्म में 'क्षणिकवाद' (Doctrine of Impermanence) का क्या अर्थ है?A. ईश्वर सर्वव्यापी हैB. आत्मा अमर हैC. संसार स्थिर हैD. हर वस्तु निरंतर परिवर्तनशील और क्षणभंगुर हैExplanationबुद्ध के अनुसार कोई भी वस्तु स्थायी नहीं है, सब कुछ बदलता रहता है। संसद के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राज्यपाल की शक्ति किस अनुच्छेद में है? संविधान का अनुच्छेद 1 किस रूप में भारत का वर्णन करता है? हड़प्पा सभ्यता में ‘नहरों’ के साक्ष्य कहाँ से मिले हैं? जैन धर्म का प्रथम ‘विभाजन’ कहाँ हुआ था? किस राजपूत शासक ने ‘लक्ष्मण संवत’ की शुरुआत की थी? Sign Up For Daily NewsletterBe keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.[mc4wp_form]By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time. Share This Article Facebook Copy Link Print Share Previous Article बुद्ध की सबसे ऊँची ‘बामियान’ की मूर्तियाँ किस देश में स्थित थीं जिन्हें नष्ट कर दिया गया? Next Article मगध का वह कौन सा शासक था जिसने बुद्ध के लिए ‘वेणुवन विहार’ दान किया था? Leave a Comment Leave a Comment Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. AdvertiseSearchSearchRecent Postsविभाजन के बाद दिल्ली में आए हिंदू और सिख शरणार्थियों को बसाने के लिए किस नई बस्ती का निर्माण किया गया था? ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में ‘अकाल निवारण’ के लिए निर्मित ‘स्ट्रेची कोड’ का मुख्य मंत्र क्या था? किस भू-राजस्व व्यवस्था को ‘मद्रास की संतान’ कहा जाता है? 1861 के एक्ट ने वायसराय को कौन सी आपातकालीन शक्ति दी? ब्रिटिश शासन में ‘अफीम’ का व्यापार मुख्य रूप से किस देश के साथ होता था? Recent CommentsNo comments to show.