किस अभिलेख में समुद्रगुप्त को 'पृथिव्यामप्रतिरथ' (धरती पर जिसका कोई प्रतिद्वंद्वी न हो) कहा गया है?
हरिषेण ने प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त की अजेय शक्ति का वर्णन करते हुए उसे 'पृथिव्यामप्रतिरथ' की उपाधि दी है।

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